Thursday, October 22nd, 2026

आत्मनिर्भर MP: रिश्वत लेकर बाबू ने दूसरे का काम किया, नागरिकों ने दिया सुझाव आर्थिक आधार पर करे आरक्षण

भोपाल
सीएम साहब नामांतरण के लिए तहसील सबलगढ़ का बाबू पांच हजार रिश्वत मांग रहा है। रिश्वत देने के बाद भी काम नहीं हो रहा। रुपए मैने दिए और शिकायत किसी दूसरे की हल हो गई। यह पीड़ा है मुरैना जिले की सबलग्ढ़ तहसील के निवासी  मुकेश शाक्य की जो उन्होंने सीएम जनसेवा पोर्टल पर दर्ज कराई है।

मुरैना जिले की सबलगढ़ तहसील के वार्ड नंबर दो द्वारकापुरी कॉलोनी निवासी मुकेश शाक्य ने नीलम शाक्य की ओर से हेमंत प्रसाद शाक्य और शुभम शाक्य के नाम से किए जा रहे नामांतरण पर आपत्ति दर्ज कराने सबलगढ़ तहसील कार्यालय में आवेदन किया था। वहां के बाबू लालाराम जौरी ने ना तो आवेदन प्राप्ति की रसीद दी और ना ही कोई कार्यवाही की गई।

सीएम हेल्पलाईन में यह शिकायत की तो यह कहते हुए शिकायत नस्तीबद्ध कर दी कि आवेदिका ने जिस आपत्ति का हवाला दिया वह नायब तहसीलदार झुंडपुरा में प्राप्त नहीं होंने के कारण हेमंत प्रसाद शाक्य और शिवंत शाक्य के नाम विक्रय पत्र के आधार पर स्वीकृत कर दिया गया है। आवेदक को वरिष्ठ न्यायालय में अपील करने की सलाह देते हुए शिकायत निरस्त कर दी गई। उसने पोर्टल पर बताया है कि बाबू लाला राम जोहरी ने पांच हजार रुपए की मांग की थी। जिसको उसने पूरा कर दिया उसके बाद भी हेमंत शाक्य का नामांतरण कुछ पैसे लेकर दि दिया। जबकि आपत्ति लगाने के बाद भी आज तक उसका नामांमरण खारिज नहीं किया गया है।

आर्थिक आधार पर हो आरक्षण-दीपक बक्शी ने सुझाव दिया है कि आरक्षण खत्म होना चाहिए। वास्तव में जो गरीब हो वो किसी भी जाति वर्ग से हो सरकार को उसकी मदद करना चाहिए। निजी अस्पताल और निजी स्कूल पर भी कुछ कमांड सरकार की होना चाहिए। उमरिया की मानपुर तहसील के सिगुड़ी गांव के निवासी मुनीम साहू ने सुझाव दिया है कि गरीब व्यक्ति के लिए आपरेशन की डेट किसी अच्छे हास्पिटल में मिल जाए और दवाई हेतु आनलाइन योजना जोड़ी जाए।शहडोल निवासी नितिन गर्ग का सुझाव है कि कोई भी योजना जरुरतमंद तक पहुंचने के लिए उसे प्रमुख स्थान मंदिर, आंगनबाड़ी, नुक्कड़ , शैक्षणिक स्थान पर उसका प्रचार किया जाना चाहिए।

आशीष उरमलिया ने सुझाव दिया है कि इकानामिकल स्टेट के अनुसार आरक्षण दिया जाना चाहिए। नीरज अग्रवाल ने सुझाव दिया है कि अन्य सेवाओं की तरह  ईडब्ल्यूएस आर्थिक आधार पर आरक्षण को भी आनलाईन किया जाना चाहिए। क्योंकि इसके लिए हर साल प्रमाणपत्र बनवाना पड़ता है और तहसील के कई चक्कर लगाना पड़ता है परेशानी भी होती है।शशि डहरवाल ने सुझाव दिया है कि किसी भी कांपीटीशन में आरक्षण नहीं होना चाहिए।

दीपक कटारिया ने पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है कि कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए शुरु की गई योजना में उद्योग लगाने एमपीआईडीसी भोपाल में पत्राचार करने के बाद भी काम नहीं हो रहा है। आईडीसी सरकार की योजनों को विफल करने की साजिश कर रहा है।

 

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Source : Agency

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